Sahibganj: लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया कल्यानचक फाटक का अंडरपास अब परेशानी का सबब बन गया है। बारिश के बाद अंडरपास में हुए जलजमाव ने राहगीरों, स्कूली बच्चों और वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। स्थिति ऐसी है कि स्थानीय लोग अब इस अंडरपास को व्यंग्य में स्वीमिंग पूल कहकर संबोधित कर रहे हैं।
अंडरपास में कई दिनों से पानी जमा रहने के कारण लोगों को घुटने तक पानी में होकर गुजरना पड़ रहा है। पैदल चलने वाले लोग जूते-चप्पल हाथ में लेकर रास्ता पार करने को मजबूर हैं, जबकि दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग हादसों का केंद्र बनता जा रहा है। पानी के भीतर गड्ढे दिखाई नहीं देने के कारण कई बाइक सवार दुर्घटना का शिकार हो चुके हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेलवे द्वारा करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस अंडरपास में जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई। नतीजतन हर बारिश के बाद यह क्षेत्र तालाब में तब्दील हो जाता है। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए इसकी जांच की मांग की है।
हाल ही में बाइक दुर्घटना में घायल हुए रॉकी ठाकुर ने बताया कि पानी भरे होने के कारण सड़क का अनुमान नहीं लग पाता। इसी वजह से उनकी बाइक गड्ढे में फंसकर पलट गई और उन्हें चोटें आईं। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
स्थानीय निवासी शंकर ठाकुर ने कहा कि जिस अंडरपास को लोगों की सुविधा के लिए बनाया गया था, वही अब रोजाना सैकड़ों लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। उन्होंने रेलवे प्रशासन से तत्काल जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की।
वहीं उदय कुमार ने इस मामले में जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए कहा कि विकास के दावे तो खूब किए जाते हैं, लेकिन जमीनी समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर प्रयास नहीं दिखते। उन्होंने सांसद और विधायक से हस्तक्षेप कर स्थायी समाधान कराने की मांग की।
क्षेत्रवासियों ने रेलवे प्रशासन, निर्माण एजेंसी और संबंधित अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समस्या का समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अंडरपास जैसी महत्वपूर्ण परियोजना का उद्देश्य लोगों को राहत देना था, लेकिन वर्तमान हालात में यह सुविधा नहीं बल्कि खतरे का केंद्र बन गया है। अब लोगों की निगाहें रेलवे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
ये भी पढ़ें: प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा के लिए ग्रामीणों ने प्रशासन से की कड़ी कार्रवाई की मांग



